अकाल से बचाव हेतु टोंगरी बाध नुमा धान खेत में अरहर की खेती करे किसान- डॉ आरसी मेहता

 

अकाल से बचाव हेतु टोंगरी बाध नुमा धान खेत में अरहर की खेती करे किसान- डॉ आरसी मेहता


हजारीबाग-झारखंड बिहार सहित अनेकों राज्य में औसत से कम वर्षा होने के कारण अकाल की स्थिति हो गई है 2 वर्षों तक कोरोना आपदा का दंस किसान झेल हि रहे थे कि आज अकाल की स्थिति उत्पन्न हो गई है 95%धान का बिहन/बिचड़ा अभी तक नहीं हुवा है।

किसान अकाल आपदा से निपटने हेतु टोंगरी बाध नुमा धान खेत में अगहनी अरहर की खेती करें।यह बातें कुशवाहा महासभा के केंद्रीय सलाहकार डॉ आरसी मेहता ने कुशवाहा किसान विचार गोष्ठी में कहा। डॉ मेहता ने कहा की जिस खेत में किसान धान खेती करना चाह रहे थे उसमें अगहनी रहर को अभी से बोना शुरू करें, जिसका कटनी लगभग 3.5 महीना में होगा। अरहर की खेती नगदी फसल के अंतर्गत आता है नगद राशि मिलने से किसान अपने परिवार और अपना परवरिश अच्छे ढंग से कर सकेंगे । किसानों की हालात दुनिया में दयनीय है इनकी हालात दिनों दिन बद से बदतर होते चला जा रहा है, किसानों का लागत मुल्य के अनुपात में विक्रय मूल्य लाभप्रद नहीं है लाभ यदि हो रहा है तो मात्र बिचौलियों और व्यापारियों का। किसान खेती छोड़कर मजदूरी करना ज्यादा पसंद कर रहे है या मेट्रोपॉलिटन सिटी में पलायन कर रहे हैं सरकारों का नीति भी किसानो के लिए हितकर नहीं है आज किसान देश की अर्थव्यवस्था को संभाले हुए हैं देश में लगभग 70 प्रतिशत लोग कृषि पर निर्भर है सरकारे को कृषि और कृषक पर विशेष ध्यान देंने की जरूरत है। किसान देश की अर्थव्यवस्था को संतुलित किए हुए हैं अनाजों का उत्पादन यदि घटता है तो देश की स्थिति श्रीलंका जैसा हो सकता है। विचार गोष्ठी में मुख्य रूप से डॉ अशोक महतो डॉ चूड़ामणि दांगी अर्जुन कुमार तुलसी कुमार प्रयाग राम विजय कुमार संतोष महतो मनजीत कुमार इत्यादि दर्जनों लोग उपस्थित थे

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